✍🏿 टेर - अवगुण गारा घणा दीठा मुखे मीठा अंदर झुठा वचनों रा नर हिणा वो नहीं सैण हमारा !! टेर ।।
✍🏿 शेख फरिष्दा के भजन की कड़ी की टेर ।।
✍🏿 हे गुरु ज्ञानी म्हारे साररा मिट जावे भरम अंधेरा है हे सत साहेब मेरो सायबो हो जी ।।
✍🏿 डूंगरपुरी जी :- अवल वाणी अवल खाणी अवल रो उपकार है
साच केता झूठ माने नहीं तेरो इतबार है ।।1।।
शेख फरिष्दा :- सतगुरु पारस खाँण है लोहा जुग संसारा
टुकीएक पारस वारे संग रमें कंचन होवे तन सारा ।।2।।
डुंगरपुरी जी :- जाणु से गुण ले नी जाणे अजाणों रो यार है
गाफलो से हेत राखे बड़ो ही बेकार है ।।3।।
✍🏿 डुंगरपुरी जी :- अमृत रस ले आक सीचों मीठो नहीं निराधार जी
नींब मो नारेल केसो केसो नुगरों रो आकार है ।।5।।
✍🏿 शेख फरिष्दा :- शीप शायरियां मो रहत है क्या समुंदरों रो लेत है
बुंद पड़े आसमान री शोभा शायरियां को देत हैं ।।6।।
✍🏿 डुंगरपुरी जी :- शकर में एक कंकर मिलयों पत्थर रो परिवार है
पेली मिठा पसे खारा अंत खारोखार है ।। 7।।
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शेख फरिष्दा :- थेतो हीरो रा व्यापारी ओ जी हीरे हीरे गुण भराओ
जद मिले हीरो पारखु जद मुंगे मोल बिकावो ।।8।।
✍🏿 डूंगरपुरी जी :- शिमरले गुरु साचा शब्द साचा खेल खोंडे धार है
स्वामी डूंगरपुरी जी बोलियां प्रेम लागो पार हैं ।।9।।
✍🏿 शेख फरिष्दा :- सतीये सत धर्म झेलियो भवजल उतरया पारा
शेख फरिष्दे री विणती जुगोजुग दास तुम्हारा ।।10।।
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जयय श्री डूंगरपुरी जी महाराज की 🙏🙏🙏
thank
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